उपास्थिल मीन-स्कोलिओडॉन का वर्गीकरण (Scoliodon classification in hindi):-
जन्तु-जगत् (Kingdom Animalia);
संघ - कॉर्डेटा
उपसंघ - वर्टीब्रेटा
समूह - नैथोस्टोमैटा
महावर्ग - पिसीज
वर्ग - कॉन्ड्रिक्थीज
उपवर्ग - इलैस्मोक्रैन्काइ
गण - स्क्वैलीफॉर्मिस
स्कोलिओडॉन के बाह्य लक्षण (Scoliodon characteristics in hindi):-
(1) इसका शरीर लगभग 30 से 60 सेमी तक लम्बा होता है। अधरतल पर सफेद-सा, पृष्ठतल पर भूरा-सा, पार्श्वों में कुछ चपटा तथा तर्कुरूपी अर्थात् धारारेखित होता है। अतः जल में तैरने के लिए उपयुक्त पाया जाता है।
(2) सिर पृष्ठ एवं अधर तलों पर चपटाहोता है। आगे नुकीली तुण्डहोती है। अधरतलीय, चौड़ा व अर्धवृत्ताकार-सा मुख एवं जबड़े दन्तयुक्त होते हैं। मुख के पावों में एक-एक बाह्य नासाद्वार होता है, जो केवल घ्राण संवेदांगों का कार्य करते हैं।
(3) सिर के पार्श्वों में एक-एक बड़ी पलकयुक्त आँखें होती हैं। इनके ठीक पीछे जल-क्लोमों से सम्बन्धित पाँच-पाँच क्लोम
दरारें होती हैं।
(4) तैरने के लिए, दो जोड़ी पार्श्व पखने और आगे अंस पखने होते हैं। एवं पीछे श्रोणि पखने, एक मध्य अधर पखना, दो मध्यपृष्ठ पखने तथा एक पुच्छ पखना होता है।
(5) नर में श्रोणि पखनों से जुड़े हुए एक जोड़ी मैथुन अंग अर्थात् आलिंगक होते हैं।
(6) पूरी त्वचा छोटी-छोटी प्लैकॉएड शल्कों के कारण खुरदरी होती है।
(7)पूरा अन्तःकंकाल उपास्थि का बना होता है।
(8) अन्तःसंसेचन एवं भ्रूणीय परिवर्धन मादा के गर्भाशय में होता है। भ्रूणों का पोषण पीत-पुटक आँवलों के द्वारा होता है। अतः मादाएँ बच्चे देती हैं, अर्थात् पिण्डज होती हैं।

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