घोंघा - पाइला (pila) का वर्गीकरण (classification) :-
संघ - मोलस्का
वर्ग - गैस्ट्रोपोडा
उपवर्ग - प्रोसोब्रैंकिया
गण - मीसोगैस्ट्रोपोडा
शाखा - यूमेटाजोआ
प्रभाग - बाइलैटरिया
उपप्रभाग - प्रोटोस्टोमिया
खण्ड - यूसीलोमैटा
प्राकृतिक वास
घोंघा, झीलों, तालाबों, चावल के खेतों आदि में पाया जाता है।
घोंघा के बाह्य लक्षण (Pila or apple snail comments in hindi) :-
- इसका आकार सेब के समान होता है।
- इसका शरीर और कवच कुंडलित होता है।
- इसके कवच में एक ओर चौड़ा सा अंडाकार द्वार होता है, इस पर ढक्कन चपटा होता है।
- कवच के दूसरी तरफ नुकीला सिरा होता है, जिसे शिखर कहते हैं।
- कवच में लगभग 6.5 कुण्डल होते हैं।
- इसके रेंगने के लिए ऑपरकुलम से जुड़ा हुआ मजबूत, मांसल और चपटा पाद होता है।
- इसके पाद के पृष्ठतल की तरफ शीर्ष होता है।
- इस पर दो जोड़ी स्पर्षक एवं एक जोड़ी नेत्र डण्ठलों पर आंखें स्थित होती हैं।
- शीर्ष एवं पाद को छोड़कर बचा हुआ शरीर त्वचा के पतले भंज अथवा प्रावरण से ढका रहता है।
- गुहा में जलीय श्वसन के लिए जलक्लोम एवं वायु श्वसन के लिए फुफ्फुसीय कोश पाए जाते हैं।
- इस प्रकार जल और भूमि दोनों पर रहने की क्षमता के कारण घोंघा उभयचर होता है।
- इसकी आहारनाल कुंडलित व लंबी होती है, पाचन ग्रंथियां भी कुण्डलित होती है।
- एक बड़ा सा वृक्क उत्सर्जन के लिए होता है।
- तंत्रिका तंत्र कई जोड़ी गुच्छकों और इनको जोड़ने वाली तंत्रिकाओं का बना शरीर ऐंठन के कारण 8 की आकृति का होता है।
- कुछ संवेदांग उपस्थित होते हैं।
- यह एकलिंगी होता है, जनद केवल एक होता है।
- मैथुनांग और विकसित जननवाहिनियां पाई जाती हैं।
- मादा के शरीर में संसेचन लेकिन भ्रूणीय परिवर्धन बाहर की तरफ गीली मिट्टी में पाया जाता है।
- मादा एकबार में लगभग 200 से 800 अंडे देती है।

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