प्रोटिस्टा जगत- संघ प्रोटोजोआ के प्रमुख लक्षण :-
- इनका शरीर अति सूक्ष्म 0.001 से 3.00 मिमी. तक होता है।
- इनको सूक्ष्मदर्शी के द्वारा ही देखा जा सकता है।
- इनका शरीर नग्न या महीन पेलिकल द्वारा ढका रहता है।
- इस संघ के कुछ जंतुओं में शरीर कठोर खोल में बंद होता है।
- गमन करने के लिए कसाभ, पादाभ, रोमाभ पाए जाते हैं।
- उत्सर्जन एवं गैसीय विनिमय शरीर सतह से सामान्य विसरण द्वारा होता है।
- इनमें एक या कई प्रकार के सामान केंद्रक पाए जाते हैं, कुछ जंतुओं में केवल दो प्रकार के समान केंद्र पाए जाते हैं।
- इनमें पोषण प्राणिसम, पादपसम, परजीवी या मृतोपजीवी होता है, कुछ जंतुओं में एक से अधिक पोषण विधियां पायी जाती हैं।
- आवश्यकता पड़ने पर जल की मात्रा के नियंत्रण के लिए एक या उससे अधिक संकुचनशील रितिकाएं पाई जाती हैं।
- शरीर की आकृति अनेक प्रकार की होती है जो जाति के अनुसार स्थिर होती है।
- कुछ जंतुओं में वातावरणीय दशा, गमन या आयु की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तनशील होती है।
- वातावरणीय परिवर्तनों के अनुसार प्रति क्रियाशीलता अत्यधिक सरल होती है।
- इनमें जनन लैंगिक या अलैंगिक होता है, जनन करने के लिए या प्रतिकूल वातावरण में सुरक्षा के लिए परिकोष्ठनन की व्यापक क्षमता पायी जाती है।
- यह गीली मिट्टी, सड़ी गली कार्बनिक वस्तुओं, जल आदि में पाए जाते हैं।
- यह या तो अकेले रहते है या संघ में रहते हैं।
संघ प्रोटोजोआ के जंतुओं के नाम एवं वर्गीकरण :-
- उपसंघ - सार्कोमैस्टिगोफोरा :-
- वर्ग - मैस्टिगोफोरा :-
उदाहरण :- यूग्लीना
- वर्ग - सार्कोडिना :-
उदाहरण :- अमीबा
- वर्ग - ओपैलाइनैटा
उदाहरण :- ओपैलाइना
2. उपसंघ - स्पोरोजोआ
- वर्ग - टीलोस्पोरिया
उदाहरण :- प्लाज्मोडियम
- वर्ग - पाइरोप्लाज्मियां
उदाहरण :- बैबेसिया
3. उपसंघ - निडोस्पोरा
- वर्ग - मिक्सोस्पोरिया
उदाहरण :- सीरैटोमिक्सा
- वर्ग - माइक्रोस्पोरिया
उदाहरण :- नोसीमा
4. उपसंघ - सिलियोफोरा
- वर्ग - सिलिएटा
उदाहरण :- पैरामीशियम

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